याद:- एक उम्र गुजरने के बाद आज वो याद आया

एक उम्र गुजरने के बाद आज वो याद आया,
सहरा बनी आंखों से मेरी फ़िर सैलाब आया,
खो गया कुछ इस कदर यादों की दुनिया में,
क्या मालूम कब आफताब गया महताब आया।
ज़िन्दगी भी करने लगी सवाल मुझसे ये कहकर,
ऐ ज़ालिम क्यूं तू मुझको यूं बर्बाद कर आया,
एक शख़्स ही तो था वो कोई खुदा तो नहीं था,
जलाकर आशियां अपना, गुलिस्तां तू जिसका शादाब कर आया।
इस उम्मीद में के वो आएगा वापस लौटकर इक दिन,
ख़ुदा का ऐसा कोई घर नहीं बचा जहां मैं करके फ़रियाद ना आया,
चेहरे पर मेरे मुस्कराहट देखकर आईना भी बोल उठा,
बहुत देखे मैंने मगर सामने कभी तुझ सा दिलशाद ना आया।
आए तो बहुत से तूफान दहलीज़ पर मेरे दिल की मगर,
टूटे हुए मकान-ए-दिल को कोई करने आबाद ना आया,
चिराग, जुगनू, आंखे, चेहरा, समन्दर, दश्त, गुलज़ार, सहरा,
एक ही रात में क्या बताऊं मुझे क्या-क्या याद ना आया।
Author: Bobby Bisht

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